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  • Who is an Ajivak
    Apr 19, 2025

    One who achieves Happiness, Well-being and Prosperity in own life by doing useful work by optimum utilization of own Resources (Time, Money, ability to Work, ability to Understand and ability to form Group). Never Begs. Cooperates for own welfare.


  • हमारी आवश्यकताएं
    Apr 09, 2025

    माननीय सदस्यों हम आजीवक लोग सामूहिक रूप से केवल चार चीजों को प्राप्त करने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं। वे हैं -- समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सुविधा, कम वेतन अनुपात वाली रोजगार गारंटी, घर तक न्याय इसके अलावा हमें कुछ नहीं चाहिए। कृपया अपनी राय लिखें।


  • AWDRT website
    Apr 09, 2025

    आजीवक कल्याण एवं विकास अनुसंधान ट्रस्ट की वेबसाइट तैयार की जा रही है। माननीय सदस्य अपना फीड बैक दें। शीघ्र ही आप ऑनलाइन सदस्य बन सकते है।


  • खुशियां, सुख, समृद्धि चाहिए, आओ मिल मंथन करें।
    शिक्षित बन संगठन बनाएं, अपना जीवन सफल करें।

    आजीवक कल्याण एवं विकास अनुसंधान ट्रस्ट (AWDRT) का लोगो है। सबसे ऊपर की हरी पट्टी खुशी, सुख और समृद्धि प्राप्त करने के लक्ष्य को दर्शाता है। बीच में सफेद रंग की पांच तीलियों वाला चक्र हमारे परिवर्तनशील संसाधनों ( धन, बल, बुद्धि, समय और संगठन शक्ति) को दर्शाता है। सबसे नीचे की नीली पट्टी हमें अपने संस...

    About Us
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    About Us

    छठी शताब्दी पूर्व में समकालीन ब्राह्मण, बौद्ध, जैन और आजीवक नाम से चार प्रमुख धर्म (विचारधारा) पूर्ण विकसित थी जिसके संस्थापक क्रमशः काल्पनिक शक्ति, बुद्ध, महावीर और मक्खली गोसाल थे। आज आजीवक धर्म की कोई सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। हमें जो भी थोड़ी बहुत जानकारी आजीवकों के बारे में मिलती है वह केवल ब्राह्मण, जैन और बौद्ध ग्रंथों में लिखी उनकी आलोचना से मिलती है। जिसमें आजीवकों को स्त्री गुलाम, भोगी, मलिच्छ, देवी- देवताओं की मूर्तियों पर मल मूत्र त्यागने वाला, मूर्ख, घमंडी, भाग्यवादी (नियतिवादी) आदि रूप से बुरा भला कहा गया है। अर्थात ये तीनों धर्म आजीवकों के विरोधी थे। आज आजीवक कल्याण एवं विकास अनुसंधान ट्रस्ट (AWDRT) आजीवक दर्शन को विज्ञान, प्राकृतिक नियमों और संविधान की मूल भावना के आधार पर व्याख्या करके पुनर्स्थापित कर रहा है। आजीवक धर्म को स्वयंभुओं ने विलुप्त धर्म कहा जबकि यह कभी विलुप्त हो ही नहीं सकता । क्योंकि यह पूर्णतया प्राकृतिक नियमों पर आधारित है। प्राकृतिक नियम/विज्ञान ही असली सनातन धर्म है। पूरे नंद वंश काल और मौर्य वंश में बिंदुसार के समय में इसका पूरा बोलबाला था। अशोक और उनके पोते दशरथ ने आजीवकों को बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित बराबर की 3 - 3 गुहाएं दान करके इस धर्म को संरक्षित किया। कबीर, रविदास, फूले, पेरियार, गुरुनानक आदि महापुरुषों ने इसका बहुत विस्तार किया। आज संविधान में भी इसी धर्म की विचारधारा को महत्व दिया गया है। संविधान निर्माताओं ने सभी धर्मों में व्याप्त बुराइयों को अमान्य / अधर्म घोषित करके संविधान को जनकल्याणकारी बनाकर इसी जीवन में खुशी, सुख और समृद्धि भरने का काम किया है। वास्तव में यह धर्म कभी भी विलुप्त / नष्ट हुआ ही नहीं बल्कि स्वयंभुओं ने इसका ज्यादातर हिस्सा अपने साथ जोड़कर अपने को सनातन घोषित करके बड़े बड़े धन्नासेठों, साहूकारों या राजाओं को अपने पक्ष में लाकर बड़े बड़े संसाधनों द्वारा मूर्तियों, मठों, धार्मिक स्थलों, धार्मिक शिक्षा संस्थानों को बनवाकर जनता को मदद के नाम पर अनेक प्रकार के अनैतिक दबाव बना कर उनकी कमाई के हिस्से को अपनी ओर खींच कर उपभोग करने लगे । इस प्रकार से आजीवक समाज टूट कर कई धर्मों में विभाजित हो गया। किंतु उन्होंने विभिन्न धर्मों में जाने के बाद भी अपनी मूल पहचान को बनाए रखा है। उदाहरण के तौर पर शादी करना, बच्चे पैदा करना, उनकी देखभाल करना, आत्मरक्षा करना, उन्हें आजीविका के काम सिखाना आदि आदि। स्वयंभुओं की तरह आज की भी ज्यादातर सरकारें जनता को मुफ्त राशन, लैपटॉप, घर, टॉयलेट, मुफ्त बिजली, पानी, धार्मिक यात्रा, सम्मान निधि आदि देकर और बड़े बड़े धार्मिक स्थल और महापुरुषों की मूर्तियां बनावाकर कर संविधान विरोधी कार्य करके लोगों को ठग/लूट रही हैं। आजीवक कल्याण एवं विकास अनुसंधान ट्रस्ट आज आजीवक समाज को इकठ्ठा करके उन्हें जागृत कर रहा है। लोगों को मानव जीवन के सभी रहस्यों (पैदा होने के पहले से लेकर, वाल्यावस्था, जवानी, बुढ़ापा, मृत्यु और उसके बाद) को वैज्ञानिक और प्राकृतिक नियमों की कसौटी पर कसकर प्रशिक्षित कर रहा है। जिससे समाज में आजीवक/ विद्वान / सर्वज्ञानी / समझदार / सर्वश्रष्ठ लोगों को पैदा किया सके और उन्हें बिना पैसा खर्च किए ग्राम सभाओं, विधान सभाओं और संसद में पहुंचाया जा सके। जो संविधान की मूल भावना के अनुकूल सभी के लिए समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा , स्वास्थ्य देखभाल सुविधा , घर तक न्याय और कम वेतन अनुपात वाली रोज़गार की गारंटी प्रदान करवा सकें। जिससे हम आत्म निर्भर होकर ख़ुशी , सुख और समृद्धि हासिल कर सकें। आजीवक बनें। शक्तिशाली बनें। जय आजीवक ! जय भारत !

    Chairman Message

    माननीय देश के असली मालिकों,
    आपकी सरकार आपके द्वारा कमाए हुए संसाधनों को संवैधानिक कार्यों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल सुविधा, रोज़गार और न्याय पर खर्च न करके आपको धार्मिक उन्माद, अन्धविश्वास, पाखंड, मुफ्तखोरी, काल्पनिक शक्तियों और गड़े हुए मुर्दों की दुनिया में ढकेलने और आपको आपस में अपनों से ही लड़ाने के लिए खर्च कर रही है। साथ साथ लोकतंत्र को नष्ट करने के लिए मनमानी तरीकों से चुनाव आयुक्त बनाकर EVM द्वारा आपके वोटों की चोरी करवा ले रही है। धार्मिक उन्माद पैदा करके, आपको आपस में लड़ाकर, EVM द्वारा आपके वोटों की चोरी करके लुटेरों / ठगों / धन्ना सेठों / निकम्मों को आपका प्रतिनिधि जितवा ले रही है। न्यायपालिका में निष्पक्ष चयन प्रक्रिया लागू न करके और जानबूझकर न्यायाधीशों की कमी करके न्याय व्यवस्था को ध्वस्त कर चुकी है। लोकतंत्र के हत्त्यारों, संविधान विरोधियों, न्याय पालिका को ध्वस्त करने वालों, निकम्मों , नामर्दों , पतितों को सत्ता से रोकने के लिए अपने गांव/मोहल्ले से कम से कम पांच ऐसे लोगों की टोलियां बनाएं जिनके अंदर संविधान की मूल भावना के अनुकूल सभी को सरकारी खर्चे पर सम्पूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल सुविधा, कम वेतन अनुपात वाली रोज़गार गारंटी और घर तक न्याय दिलवाने की दृढ़ इच्छा शक्ति हो। उपर्युक्त भावना से ओतप्रोत लोगों को ही हम आजीवक कहते हैं। संविधान की मूल भावना लागू होने से हम आजीवक लोग आत्मनिर्भर होकर अपने अपने घर परिवार में खुशी, सुख और समृद्धि स्वतः भर सकेंगे। अपना असली प्रतिनिधि चुनकर आजीवक सरकार बनाने के आलावा आपके पास कोई और रास्ता नहीं है। आपका भला कोई भी ऊपर या नीचे वाली काल्पनिक शक्ति या मरा हुआ महापुरुष नहीं कर सकता है। यह बात आधुनिक विज्ञान द्वारा सिद्ध की जा चुकी है। आपके वोटों में ही वह शक्ति है जिससे आप अपनी समस्त समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। आइए हम सब संविधान की मूल भावना को लागू करवाने के लिए इकठ्ठा हो जाएं और आजीवक कल्याण एवं विकास अनुसन्धान ट्रस्ट (AWDRT) की सदस्यता ग्रहण करें। मात्र ₹100 प्रतिवर्ष की सदस्य शुल्क पर खुद असली ग्राम प्रधान, सभासद, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, नगर अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक और सांसद बनें। आजीवक बनें! शक्तिशाली बनें !!
    जय आजीवक ! जय भारत !
    धन्यवाद।

    Our Mission
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    Free Education facility for all

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    Free Healthcare facility for all

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    Free and fare Justice in time for all

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    Garanteed Employment for all above 18+ with minimum wage ratio

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    To set up true democracy

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